अस्पतालों की फार्मेसी में दवाओं की कीमतों का बड़ा अंतर उजागर
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Published - 04 October 2026 5 views
214 फार्मेसियों की जांच में 130 दवाओं का विश्लेषण, 36 की एमआरपी खरीद कीमत से 10 गुने से अधिक
लखनऊ, 4 अक्टूबर। अस्पतालों की फार्मेसियों में दवाओं की खरीद कीमत और पैक पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के बीच भारी अंतर सामने आया है। उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (यूपीएफएसडीए) की ओर से मेडिकल कॉलेजों और निजी अस्पतालों की फार्मेसियों के निरीक्षण के दौरान जुटाए गए आंकड़ों में कई गंभीर और जीवनरक्षक दवाओं की एमआरपी खरीद दर से कई गुना अधिक पाई गई।
प्रदेश की 214 अस्पताल फार्मेसियों से जुटाए आंकड़ों में 130 दवाओं का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। इनमें 36 दवाओं की एमआरपी खरीद कीमत से 10 गुने से अधिक थी। कुछ मामलों में यह अंतर करीब 67 गुने तक पहुंच गया। खास बात यह है कि सूची में आईसीयू, गंभीर संक्रमण और जटिल चिकित्सकीय स्थितियों में इस्तेमाल होने वाली कई इंजेक्टेबल दवाएं भी शामिल हैं।
अध्ययन के अनुसार Polymyxin-B Injection की एक इकाई ₹74.09 में खरीदी गई, जबकि पैक पर एमआरपी ₹4,980.94 दर्ज थी। इसी तरह Terlipressin Injection की खरीद कीमत ₹56 के मुकाबले एमआरपी ₹3,050 रही। Colistimethate Sodium की खरीद दर ₹210 और एमआरपी ₹9,702.31, जबकि Tigecycline Injection की खरीद कीमत ₹154.54 और एमआरपी ₹7,110.47 दर्ज की गई।
Caspofungin 70 mg की एक ब्रांडेड दवा ₹800 में खरीदी गई, जबकि उसकी एमआरपी ₹21,230 थी। वहीं कैंसर उपचार में इस्तेमाल होने वाली Bevacizumab 400 mg की खरीद कीमत ₹7,541.10 और एमआरपी ₹69,995 दर्ज हुई। यानी दोनों के बीच ₹62,453.90 का अंतर रहा।
जांच में मेडिकल उपकरणों की कीमतों में भी बड़ा अंतर सामने आया। एक 3-way stop cock की खरीद कीमत ₹6.40 के मुकाबले एमआरपी ₹163 दर्ज की गई। दूसरे उपकरण की खरीद कीमत ₹20.95 और एमआरपी ₹500 पाई गई।
इन आंकड़ों ने दवाओं की मूल्य निर्धारण व्यवस्था, ट्रेड मार्जिन और मरीजों को मिलने वाली वास्तविक कीमत को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, खरीद कीमत और एमआरपी के बीच अंतर अपने आप में यह साबित नहीं करता कि अस्पताल या निर्माता ने नियमों का उल्लंघन किया है। संबंधित मामलों में विभागीय जांच और लागू नियमों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी। मरीजों के हित में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अत्यधिक एमआरपी और वास्तविक खरीद लागत के बीच अंतर का लाभ वास्तव में उपभोक्ता तक कितना पहुंच रहा है।
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