बारिश के बाद बाढ़ का कहर, सैकड़ों बीघा धान, उड़द, तिल्ली और मक्का की फसल जलमग्न / असोहा क्षेत्र में सई नदी का जलस्तर बढ़ने से सड़क पर दो से तीन फीट पानी, जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे ग्रामीण
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Published - 30 September 2026 124 views
सोमेंद्र नाथ
सार्थक संवाददाता उन्नाव
लगातार तीन दिनों तक हुई बारिश के बाद असोहा विकासखंड क्षेत्र में सई नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। असोहा-कालूखेड़ा मार्ग से ग्रामसभा बेलौरा के मजरा नया खेड़ा होते हुए लखनऊ के जुनावगंज-मोहनलालगंज मार्ग तथा सरोजनीनगर विकासखंड की ग्रामसभा खसरवारा-धावापुर के बीच जोड़ने वाली प्रमुख सड़क का करीब एक किलोमीटर हिस्सा जलमग्न हो गया है। सड़क के ऊपर दो से तीन फीट तक पानी बहने से आवागमन प्रभावित है।

असोहा विकासखंड के नया खेड़ा और भऊमऊ गांव के बीच से गुजरने वाली सई नदी में बारिश समाप्त होने के बाद आसपास के क्षेत्रों से लगातार पानी आने के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बुधवार शाम तक नदी का पानी आसपास के खेतों में फैल गया है और लगातार जल स्तर में वृद्धि हो रही है। इससे किसानों की धान, उड़द, तिल्ली और मक्का सहित विभिन्न फसलें जलमग्न हो गई हैं। ग्रामीणों के अनुसार सैकड़ों बीघा कृषि भूमि में खड़ी फसल पानी में डूब गई है।

यह मार्ग आसपास के ग्रामीणों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। सड़क पर पानी भरने के बावजूद आवश्यक कार्यों के लिए ग्रामीण जोखिम उठाकर इसे पार करने को मजबूर हैं। जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण स्थानीय लोगों में दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।

स्थिति को देखते हुए क्षेत्रीय लेखपाल अंकित कुमार ने जलमग्न क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि पूरे क्षेत्र का जायजा लिया गया है और चौपाई पुलिस चौकी प्रभारी लक्ष्मी प्रसाद कुशवाहा के साथ दिनभर जलभराव वाले स्थानों का भ्रमण कर ग्रामीणों को अनावश्यक रूप से पानी में जाने और जलमग्न सड़क का इस्तेमाल करने से रोकने का प्रयास किया गया। साथ ही जलमग्न हुई फसलों का आकलन कर इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई है।

वहीं चौपाई चौकी प्रभारी लक्ष्मी प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि जलमग्न क्षेत्र और सड़क का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। जलस्तर बढ़ने के कारण लोगों को नदी अथवा पानी से डूबी सड़क पार न करने और किसी तरह का जोखिम नहीं उठाने के लिए समझाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता महसूस हुई तो रात के समय सुरक्षा की दृष्टि से इस मार्ग पर बेरिकेडिंग कराकर आवागमन रोकने पर विचार किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो खेतों में खड़ी अन्य फसलों को भी भारी नुकसान हो सकता है। साथ ही सड़क पर पानी की गहराई बढ़ने से आवागमन पूरी तरह बंद होने की स्थिति भी बन सकती है। प्रशासन और पुलिस की निगरानी के बावजूद ग्रामीणों से जलमग्न मार्ग पर जाने से बचने की अपील की जा रही है।
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